Monday, April 12, 2010


तुम्हारे आने की बातें अब मेरी खिड़की पर भी होने लगी है.....
इन पंछियों की चहकने की वज़ह भी तुमसे शुरू होने लगी है.....
आ जाओ कि न चाहते हुए भी तुम इन लोगों के बीच बँटने लगे हो,
मेरे इंतजार की घड़ियों में भी अब सबकी नज़र पड़ने लगी है.....

2 comments:

संजय भास्कर said...

कमाल की रचना है .

संजय भास्कर said...

वाह ....Vandana जी गज़ब का लिखतीं हैं आप .......!!

main to aapka fan ho gaya hoon