Thursday, March 8, 2012

इक ही रंग.....


मैं तुम्हें सिर्फ
इक ही रंग
दे सकती हूँ।

तुम जब भी
अपने गालों को छुओगे,
देखना, कुछ प्यार-सा रंग
हाथ में भी आ जाएगा।

जो आँखों से छलके
अपनों से दूरियों का एहसास,
ममता के रँग में रँगा
इक आँचल तुम्हें हवा कर जाएगा।

जो होगे कभी
यूँ ही उदास तुम,
यह भी दुख की स्याही से
लिखा हुआ कोई अक्षर
बन जाएगा।

जो कभी द्वेष मन में सँजोये,
उद्वेलित होने लगो तुम,
तो यह भी क्रोध के तम में
जलकर आग बन जाएगा।

तुम जिस भाव से
इसे लगाओगे,
उस भाव में निहित
रँग ही बस
उभर कर आएगा।

इसलिए हाँ !
मैं तुम्हें सिर्फ
इक ही रँग
दे सकती हूँ।

18 comments:

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत सुंदर रंग है आपके पास ... और हर एक को इसी रंग की चाहत ...

होली की शुभकामनायें

प्रवीण पाण्डेय said...

मन के रंग कोउ न जाने,
सब अपना अन्तर पहिचाने..

Akhil said...

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति..

Anand Dwivedi said...

बेहतरीन रंग संयोजन है आपका ...जोकि रंग पर नहीं बल्कि लगवाने वाले के भावों पर निर्भर है !

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

जो कभी द्वेष मन में सँजोये,
उद्वेलित होने लगो तुम,
तो यह भी क्रोध के तम में
जलकर आग बन जाएगा

बेहतरीन पोस्ट।

होली की हार्दिक शुभकामनाएँ।

सादर

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

कल 10/03/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

expression said...

बहुत खूबसूरत रचना....
life is beautiful....and so is ur poetry....

regards.

Saras said...

प्रेम के विविध रंगोंको बहुत ही खूबसूरतीसे उकेरा है आपने ....बहुत प्यारी रचना

rahul ranjan said...

nice to see ur blog n ur beautiful work! keep it up//
regard

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') said...

बड़ी प्यारी रचना...
होली की बधाईयाँ...

Reena Maurya said...

bahut hi sundar or pyari rachana hai..

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

आपको नव संवत्सर 2069 की सपरिवार हार्दिक शुभकामनाएँ।

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कल 23/03/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

वन्दना महतो ! (Bandana Mahto) said...

thanx yashwant.....

is post ko shamil karne ke liye bahut bahtu dhanyawad.

waise main ab bhi kisi bhi blog par comment nahi kar pa rahi hun.

Madhuresh said...

"तुम जिस भाव से
इसे लगाओगे,
उस भाव में निहित
रँग ही बस
उभर कर आएगा।"


सुन्दर अभिव्यक्ति!

आशीष ढ़पोरशंख/ ਆਸ਼ੀਸ਼ ਢ਼ਪੋਰਸ਼ੰਖ said...

वंदना,
रंग दीनी....
ऐसा चढ़ा है के उतरा नहीं!!!
आशीष
--
द नेम इज़ शंख, ढ़पोरशंख !!!

Santosh Kumar said...

ये एक रंग अनमोल है.. सभी रंगों पर भारी पड़ता हुआ.

सुन्दर अभिव्यक्ति.

shekhar suman.. शेखर सुमन.. said...

बहुत खूब.... आपके इस पोस्ट की चर्चा आज 14-6-2012 ब्लॉग बुलेटिन पर प्रकाशित है ...अरे आप लिखते क्यूँ नहीं... लिखते रहें ....धन्यवाद.... अपनी राय अवश्य दें...

ब्लॉ.ललित शर्मा said...

बेहतरीन रचना

मिलिए सुतनुका देवदासी और देवदीन रुपदक्ष से रामगढ में

जहाँ रचा कालिदास ने महाकाव्य मेघदूत।